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Month: April 2017

मोती की खेती कैसे करते हैं ???

मोती की खेती

मोती की खेती के लिए सबसे अनुकूल मौसम शरद ऋतु यानी अक्टूबर से दिसंबर तक का समय माना जाता है। कम से कम 10 गुणा 10 फीट या बड़े आकार के तालाब में मोतियों की खेती की जा सकती है। मोती संवर्धन के लिए 0.4 हेक्टेयर जैसे छोटे तालाब में अधिकतम 25000 सीप से मोती उत्पादन किया जा सकता है। खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है या फिर इन्हे खरीदा भी जा सकता है। इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के बाद इसके भीतर चार से छह मिमी व्यास वाले साधारण या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते हैं। फिर सीप को बंद किया जाता है। इन सीपों को नायलॉन बैग में 10 दिनों तक एंटी-बायोटिक और प्राकृतिक चारे पर रखा जाता है। रोजाना इनका निरीक्षण किया जाता है और मृत सीपों को हटा लिया जाता है।

उत्तर प्रदेश में मोती की खेती का प्रशिक्षण के  लिए कॉल करे -९६४८८३४१४७ (9648834147)या

इ मेल करें – skpearls81@gmail.com
distillation.com@gmail.com
Training by arvind chaudhary

Month: April 2017

मोती उत्‍पादन क्‍या है?

मोती उत्‍पादन क्‍या है (What is pearl production)?

      

मोती एक प्राकृतिक रत्‍न है जो सीप से पैदा होता है। भारत समेत हर जगह हालांकि मोतियों की माँग बढ़ती जा रही है, लेकिन दोहन और प्रदूषण से इनकी संख्‍या घटती जा रही है। अपनी घरेलू माँग को पूरा करने के लिए भारत अंतराष्ट्रीय बाजार से हर साल मोतियों का बड़ी मात्रा में आयात करता है। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर, भुवनेश्‍वर ने ताजा पानी के सीप से ताजा पानी का मोती बनाने की तकनीक विकसित कर ली है जो देशभर में बड़ी मात्रा में पाये जाते हैं।प्राकृतिक रूप से एक मोती का निर्माण तब होता है जब कोई बाहरी कण जैसे रेत, कीट आदि किसी सीप के भीतर प्रवेश कर जाते हैं और सीप उन्‍हें बाहर नहीं निकाल पाता, बजाय उसके ऊपर चमकदार परतें जमा होती जाती हैं। इसी आसान तरीके को मोती उत्‍पादन में इस्‍तेमाल किया जाता है।है और यह कैल्शियम कार्बोनेट, जैपिक पदार्थों व पानी से बना होता है। बाजार में मिलने वाले मोती नकली, प्राकृतिक या फिर उपजाए हुए हो सकते हैं। नकली मोती, मोती नहीं होता बल्कि उसके जैसी एक करीबी चीज होती है जिसका आधार गोल होता है और बाहर मोती जैसी परत होती है। प्राकृतिक मोतियों का केंद्र बहुत सूक्ष्‍म होता है जबकि बाहरी सतह मोटी होती है। यह आकार में छोटा होता और इसकी आकृति बराबर नहीं होती। पैदा किया हुआ मोती भी प्राकृतिक मोती की ही तरह होता है, बस अंतर इतना होता है कि उसमें मानवीय प्रयास शामिल होता है जिसमें इच्छित आकार, आकृति और रंग का इस्‍तेमाल किया जाता है। भारत में आमतौर पर सीपों की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं- लैमेलिडेन्‍स मार्जिनालिस, एल.कोरियानस और पैरेसिया कोरुगाटा जिनसे अच्‍छी गुणवत्‍ता वाले मोती पैदा किए जा सकते हैं।

प्रशिक्षण  के लिए  संपर्क करें

पता (Address)

Training by – Arvind chaudhary

AK pearl. village- Karauta, p/o-Ghatrmha,  Distt.-Sant Kabir Nagar  Khalilabad  

pin-272175 Uttar Pradesh

mob no-09648834147

इ-मेल-skpearls81@gmail.com                      

distillation.com@gmail.com

Month: April 2017

ताजा पानी में मोती उत्‍पादन का खर्च

ताजा पानी में मोती उत्‍पादन का खर्च (The cost of production of pearls in freshwater)

• डिजायनदार या किसी आकृति वाला मोती अब बहुत पुराना हो चुका है, हालांकि सीआईएफए में पैदा किए जाने वाले डिजायनदार मोतियों का पर्याप्‍त बाजार मूल्‍य है क्‍योंकि घरेलू बाजार में बड़े पैमाने पर चीन से अर्द्ध-प्रसंस्‍कृत मोती का आयात किया जाता है। इस गणना में परामर्श और विपणन जैसे खर्चे नहीं जोड़े जाते।

 

क्रम संख्‍या

सामग्री

राशि(रुपये में)

1.

structure setup

RS-10000 -15000

2.

surgical sets (1set)

RS 300-500

3.

जिन्दा सीप 100

यह किसान के ऊपर निर्भर  करता  की वह  सीपों की वव्यस्था कैसे करता है खरीद कर या खुद.

RS-1500-2000

4.

water treatment

 RS 1000

5.

food wastage of pond and others

RS 500+3000

कुल योग

20000 to  22000

प्रशिक्षण  के लिए  संपर्क करें

पता (Address)

Training by – Arvind chaudhary

AK pearl. village- Karauta, p/o-Ghatrmha,  Distt.-Sant Kabir Nagar  Khalilabad  

pin-272175 Uttar Pradesh

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इ-मेल-skpearls81@gmail.com                      

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Month: April 2017

मोती की खेती की वैज्ञानिक विधि (scientific method of pearl culture)

                                                                 
प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम (Syllabus of Training):-

1. Details of oysters found in fresh water मीठे पानी में पाए जाने वाले सीपों का विवरण

2. Internal structure of oysters सीपों की आतंरिक संरचना)
3. Construction of pond and tank तालाब और टंकी का निर्माण.
4.Purification of used water
 इस्तेमाल किये जाने वाले पानी का शोधन.
5.
Examine the water by chemical and digital devices and improve quality by scientifc method केमीकल और डिजिटल उपकरणों द्वारा पानी की वैज्ञानिक विधि से  जांच करना और गुणवत्ता में सुधार करना.
6.
 Fooder for oysters सीपों के लिए चारे का निर्माण करना.
7.Preparation of oysters for surgery
 सर्जरी से लिए सीपों को तैयार करना.
8.
 सर्जरी के उपकरणों (imported व स्वदेशी) की पहचान.
9.
केन्द्रक (Nucleus- imported) की पहचान और इसका निर्माण करना.
11.
 विन्भिन्न प्रकार के सर्जरी :-
a. Mantle cavity (
डिजायनर और आधे गोल मोती).
b. 
 Mantle tissue (छोटे, गोल और दवाइयों में इस्तेमाल होने वाले मोती).
c. Gonadal (
पूर्ण गोल मोती).
12. 
सर्जरी के बाद की देखभाल.
13. 
तालाब या टंकी में विस्थापित करना.
14. 
तालाब और टंकी के पानी की गुणवत्ता को सुधार करना.
15.
 पाले हुए सीपों से मोती प्राप्त करना.
16. सीपों की हैचरी (प्रजनन).
17.
महत्वपूर्ण बिंदु.

Training by – Arvind chaudhary